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यह 30/30/30 डाइट क्या बला है?
सोचो, सुबह-सुबह चाय पी रहे हो, सोशल मीडिया चला रहे हो, और अचानक एक नया डाइट ट्रेंड दिखता है—30/30/30 डाइट। फिटनेस वाले और बिजी लोग इसके पीछे पागल हैं, कहते हैं कि इससे वजन कम होगा और आप बेहतर फील करेंगे। लेकिन अभी अपने ओटमील को प्रोटीन शेक से मत बदलो या सुबह-सुबह दौड़ने मत निकलो। आजकल हर दिन कोई नया डाइट ट्रेंड आता है, और समझ नहीं आता कि क्या सच में काम करेगा या सिर्फ हवा है।
तो यह 30/30/30 क्या है?
क्या यह सेहत के लिए अच्छा है या बस एक और बेकार का फैड?
चलो, आसान भाषा में समझते हैं कि यह आपके रूटीन में फिट बैठता है या नहीं।
30/30/30 डाइट का मतलब क्या है?
यह कोई सख्त “नो कार्ब्स, नो मजा” वाली डाइट नहीं है। यह एक सुबह का आसान चेकलिस्ट है जिसमें तीन स्टेप्स हैं:
30 ग्राम प्रोटीन लो—कुछ अंडे खा लो, ग्रीक योगर्ट (Greek yogurt) का डब्बा खोलो, या फटाफट प्रोटीन स्मूदी बना लो।
जागने के 30 मिनट में खा लो—बिस्तर में लेटे मत रहो, यह टाइम-लिमिट वाला ब्रेकफास्ट है।
30 मिनट हल्की एक्सरसाइज करो
आराम से टहल लो या हल्का कार्डियो (cardio) करो, ऐसा कुछ मत करो कि पसीना छूट जाए।
कहते हैं कि इससे दिन की शुरुआत अच्छी होगी, फैट (fat) कम होगा, और आपमें एनर्जी भरी रहेगी।
यह आइडिया टिम फेरिस का है, जो सेल्फ-हेल्प का बड़ा नाम है, और गैरी ब्रेका ने इसे हवा दी, जो बायोहैकिंग (biohacking—अपनी आदतें बदलकर सेहत ठीक करने का तरीका) का दीवाना है।
सुनने में तो मस्त लगता है, लेकिन क्या यह सच में काम करता है? चलो साइंस और एक्सपर्ट की राय देखते हैं।
क्या यह सच में सही है? स्टेप–बाय–स्टेप देखते हैं
स्टेप 1: सुबह 30 ग्राम प्रोटीन
क्यों अच्छा है: सुबह प्रोटीन से शुरू करना बुरा नहीं। सोचो, एक भरपूर ब्रेकफास्ट जो दोपहर तक भूख न लगने दे—यह प्रोटीन का जादू है। साइंस कहती है कि इससे फैट कम होता है और मसल्स (muscles) भी खुश रहते हैं।
लेकिन: प्रोटीन अकेला सबकुछ नहीं है। एक डायटीशियन, ब्रांडी रूट, कहती हैं कि इसके साथ कार्ब्स (carbs) भी लो। कार्ब्स आपको एनर्जी देते हैं, जैसे फोन चार्ज करना। नहीं लो, तो दोपहर से पहले थकान हो सकती है। थोड़ा फल या होल-ग्रेन ब्रेड क्यों नहीं जोड़ लेते?
स्टेप 2: जागने के 30 मिनट में खाना
दावा: कहते हैं कि “बेस्ट हेल्थ” के लिए जागते ही आधे घंटे में खाना जरूरी है।
सच: यह बात पक्की नहीं है। रूट कहती हैं कि इसके लिए कोई सबूत नहीं। स्टडीज बस यह कहती हैं कि ब्रेकफास्ट करना या न करना मायने रखता है, न कि यह 30 मिनट वाला नियम। अगर सुबह खाने का मन नहीं, तो जबरदस्ती मत करो। रूट का आइडिया—जागने के 2 घंटे में खा लो, वो भी ठीक है, जल्दबाजी मत करो।
स्टेप 3: खाने के बाद 30 मिनट हल्की एक्सरसाइज
फायदा: खाने के बाद हिलना-डुलना अच्छा है। आधे घंटे टहलने से ब्लड शुगर (blood sugar) कंट्रोल में रहता है, जो सेहत के लिए प्लस है। यह आसान है और हर दिन कर सकते हो।
पेंच: डाइट कहती है कि यह ब्रेकफास्ट के बाद करना है, लेकिन रूट को यह जरूरी नहीं लगता। वह कहती हैं कि किसी भी खाने के बाद—जैसे डिनर—हिलना-डुलना भी फायदा देता है। सुबह टाइम नहीं तो शाम को टहल लो, उतना ही अच्छा है। एक्सरसाइज करो, लेकिन टाइमिंग की सख्ती मत रखो।
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यह किसने बनाया?
30/30/30 डाइट कोई साइंस लैब या डॉक्टर ने नहीं बनाई। टिम फेरिस, जो सेल्फ-हेल्प का गुरु है, और गैरी ब्रेका, जो बायोहैकिंग का फैन है, इनका दिमाग है। इनके पास फैंस हैं, पॉडकास्ट हैं, और ढेर सारा हाइप है।medscape commentary
लेकिन सच यह है कि ये दोनों न्यूट्रिशन या फिटनेस के सर्टिफाइड प्रो नहीं हैं। रूट कहती हैं कि क्रेडेंशियल्स चेक करो—RD (रजिस्टर्ड डायटीशियन) या MD (मेडिकल डॉक्टर) जैसा कुछ हो तो बात बने। इन्फ्लुएंसर्स की बातें अच्छी लग सकती हैं, लेकिन एक्सपर्टाइज का पता करो।
फायदे और नुकसान: क्या यह ट्राई करने लायक है?
क्या है कमाल
प्रोटीन का दम: सुबह अच्छा प्रोटीन भूख कंट्रोल करता है और मसल्स को मजबूत रखता है।
हिलना–डुलना: दिन में थोड़ी एक्टिविटी हमेशा अच्छी है।
आसान प्लान: अगर आपको साफ स्टेप्स चाहिए, तो यह बढ़िया है।
क्या है प्रॉब्लम
सख्त टाइमिंग: 30 मिनट का नियम बिना साइंस के रैंडम लगता है।
सबके लिए नहीं: सुबह खाना या हिलना पसंद नहीं? यह आपके लिए नहीं।
एक्सपर्ट की राय: रूट कहती हैं कि यह “बस नियम के लिए नियम” है—कोई बड़ी बात नहीं।
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तो, क्या 30/30/30 ट्राई करें?
प्रोटीन और टाइमर लेकर शुरू करने का मन है? थोड़ा रुक जाओ। इस डाइट में कुछ अच्छी चीजें हैं—प्रोटीन खाना और एक्टिव रहना—लेकिन यह सख्त शेड्यूल ज्यादा हाइप लगता है, जरूरत कम। रूट कहती हैं कि यह खतरनाक नहीं (अगर आपको लो ब्लड शुगर की दिक्कत न हो), लेकिन कोई क्रांति भी नहीं। डाइट ट्रेंड्स की चमक-दमक में यह ज्यादा शो-ऑफ है, असलियत कम।
इसके बजाय अपने लिए कुछ बनाओ। सुबह प्रोटीन पसंद है? जब मन हो, खा लो। हिलना-डुलना चाहते हो? जब टाइम मिले, कर लो। जो आप कर सको, वही ट्रेंडी फॉर्मूले से बेहतर है।
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अंत में: आप ही बॉस हो
डाइट ट्रेंड्स को समझना मुश्किल हो सकता है। 30/30/30 शायद लोगों का ध्यान खींचे, लेकिन यह सेहत का परफेक्ट तरीका नहीं। कुछ बदलने से पहले किसी डायटीशियन या डॉक्टर से पूछ लो, जो आपके हिसाब से सलाह दे सके। असली सेहत हर नए ट्रेंड के पीछे भागने में नहीं, बल्कि अपने लिए सही चीज ढूंढने में है। अगली बार कोई डाइट स्क्रीन पर आए, तो चाय की चुस्की लो, सोचो, और पूछो: यह मेरे लिए काम करेगा क्या? फैसला आपका है!
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