क्या आपने कभी सोचा है कि एक कुत्ते को देखकर इतना डर लगेगा कि
ज़िंदगी मुश्किल हो जाएगी?
यह सिर्फ ‘कुत्ते का डर’ नहीं,
रेबीज ओसीडी हो सकता है।
और कभी-कभी, यह डर कुत्ते के काटने के बाद भी पैदा हो सकता है।
पर अक्सर लोग समझ नहीं पाते कि उन्हें किस डॉक्टर से मिलना चाहिए,
और यह रोग सही से पहचाना नहीं जाता।
आइए, इस स्थिति को समझते हैं, सही मदद कैसे पाएं, और सही इलाज कैसे कराएं।
Table of Contents
रेबीज ओसीडी क्या होता है?
ओसीडी एक मानसिक रोग है जहाँ बेकार के विचार (ऑब्सेशन्स)
और बार-बार किए जाने वाले काम (कम्पल्शन्स) दिमाग पर हावी हो जाते हैं।
रेबीज ओसीडी में, रेबीज से संक्रमित होने का डर सबसे बड़ा ऑब्सेशन होता है।
कल्पना कीजिए:
आपने एक आवारा कुत्ता देखा
और मन में यह विचार आने लगे,
“कहीं इसने काट तो नहीं लिया?
रेबीज हो गया तो?
मैं मर जाऊंगा?”
यह विचार बार-बार आते हैं, चैन नहीं लेने देते।
कुत्ते के काटने के बाद रेबीज ओसीडी कैसे हो सकता है?
कुत्ते का काटना एक दर्दनाक अनुभव हो सकता है।
खासकर भारत में, जहाँ आवारा कुत्तों की संख्या अधिक है, यह डर और भी बढ़ जाता है।
दर्दनाक अनुभव
कुत्ते का काटना, खासकर अगर गंभीर हो, एक दर्दनाक घटना है।
यह घटना किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है।
दर्दनाक अनुभव उन लोगों में ओसीडी को उत्तेजित कर सकते हैं,
जिनमें पहले से ही इसकी संभावना होती है।
बढ़ी हुई चिंता
कुत्ते का काटना रेबीज के खतरे के बारे में तीव्र भय और चिंता पैदा कर सकता है।
यह बढ़ी हुई चिंता जुनूनी विचारों और बाध्यकारी व्यवहारों को बढ़ावा दे सकती है।
उचित चिकित्सा उपचार प्राप्त करने के बाद भी,
संभावित परिणामों का डर बना रह सकता है।
यह रोग अक्सर पहचाना नहीं जाता
भारत में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता कम होने के कारण,
रेबीज ओसीडी अक्सर पहचाना नहीं जाता।
लोग इसे सिर्फ ‘कुत्ते का डर’ समझकर अनदेखा कर देते हैं,
जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
महत्वपूर्ण जानकारी
रेबीज लगभग 100% घातक है, लेकिन समय पर पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (टीकाकरण) से इसे 100% रोका जा सकता है।
लक्षण क्या हैं?
ऑब्सेशन्स (विचार)
रेबीज होने का लगातार डर।
रेबीज से मरने के विचार।
जानवरों के काटने या खरोंचने का डर।
क्या उस चमगादड़ ने मुझे छुआ?
क्या रेबीज हो सकता है?
रेबीज के पहले लक्षण क्या हैं?
क्या कुत्ते के काटने के बाद भी रेबीज हो सकता है?
कम्पल्शन्स (काम)
बार-बार जानवर के काटने या खरोंचने की जांच करना।
बार-बार हाथ धोना।
रेबीज के बारे में इंटरनेट पर बार-बार खोजना।
जानवरों और बाहर जाने से बचना।
डॉक्टर या परिवार वालों से बार-बार तसल्ली मांगना।
रेबीज के लक्षणों की जांच करना।
घाव को बार-बार देखना।
जीवन पर असर
रेबीज ओसीडी से पीड़ित व्यक्ति का सामाजिक जीवन प्रभावित हो सकता है।
ऐसे लोग पार्क में घूमने, पालतू जानवरों के साथ खेलने या दोस्तों और रिश्तेदारों के घर जाने से बचते हैं।
इससे सामाजिक अलगाव और अकेलेपन का अनुभव होता है, जिससे चिंता और बढ़ जाती है।
दैनिक जीवन में बहुत सी गतिविधियाँ करने में परेशानी होती है।
भारत में सही डॉक्टर से मिलें
भारत में रेबीज ओसीडी का सही निदान अक्सर नहीं हो पाता,
क्योंकि लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें कहाँ जाना चाहिए।
यहाँ कुछ विशेषज्ञों की सूची दी गई है जिनसे आपको संपर्क करना चाहिए
प्राथमिक चिकित्सा चिकित्सक (जनरल प्रैक्टिशनर)
यह आपकी पहली संपर्क जगह है।
वे आपकी शारीरिक जाँच कर सकते हैं और आगे के लिए मार्गदर्शन दे सकते हैं।
वे आपको मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक के पास भेज सकते हैं।
अगर कुत्ते का काटना हाल ही में हुआ है,
तो वे घाव का इलाज और रेबीज का टीका लगा सकते हैं।
मनोचिकित्सक (साइकेट्रिस्ट)
ये मानसिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ हैं।
वे ओसीडी का निदान और इलाज दवाइयों और थेरेपी से कर सकते हैं।
अगर दवा की जरूरत है, तो वे इसे लिख सकते हैं और निगरानी कर सकते हैं।
नैदानिक मनोवैज्ञानिक (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट)
ये मनोचिकित्सा में प्रशिक्षित होते हैं, जैसे कि सीबीटी और ईआरपी, जो ओसीडी के लिए बहुत प्रभावी हैं।
ये मनोवैज्ञानिक उपचार पर ध्यान केंद्रित करते हैं और दवा नहीं लिखते हैं।
परामर्शदाता/थेरेपिस्ट
ये आपको चिंता और डर से निपटने में मदद कर सकते हैं।
ये बात करके आपकी भावनाओं को समझने में मदद करते हैं।
अगर दवा की जरूरत है, तो वे मनोचिकित्सक के पास भेज सकते हैं।
कुत्ते के काटने के तुरंत इलाज के लिए
आपातकालीन कक्ष/अस्पताल: कुत्ते के काटने के गंभीर घाव के तत्काल उपचार के लिए।
सरकारी अस्पताल/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: यह निम्न आय वाले परिवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण संसाधन हैं।
वे रेबीज के टीके प्रदान करने में सक्षम होंगे।
कहाँ खोजें
सरकारी अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
निजी क्लीनिक और अस्पताल।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे प्रैक्टो, लायब्रेट।
मानसिक स्वास्थ्य एनजीओ जैसे निमहंस।
मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन।
महत्वपूर्ण सूचना: यहाँ दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के लिए है।
यह किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
यदि आपको या किसी और को रेबीज ओसीडी या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है, तो कृपया तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इलाज के तरीके (Treatment Explained Simply)
रेबीज ओसीडी का इलाज संभव है,
और सही समय पर सही इलाज मिलने से आप सामान्य जीवन जी सकते हैं।
यहाँ कुछ सरल तरीके बताए गए हैं
बातचीत वाली थेरेपी (Talking Therapy)
सीबीटी (CBT): यह एक तरह की बातचीत है,
जिसमें डॉक्टर आपको गलत विचारों को सही करने में मदद करते हैं।
जैसे, अगर आपको लगता है कि हर कुत्ता रेबीज वाला है,
तो डॉक्टर आपको समझाएंगे कि ऐसा नहीं है।
ईआरपी (ERP): इसमें डॉक्टर आपको धीरे-धीरे उस चीज के पास ले जाते हैं,
जिससे आपको डर लगता है।
जैसे, पहले कुत्ते की तस्वीर देखना, फिर वीडियो देखना,
और फिर असल में कुत्ते के पास जाना। इससे डर धीरे-धीरे कम होता है।
माइंडफुलनेस (Mindfulness): इसमें आपको अपने विचारों को बिना डरे देखना सिखाया जाता है।
जैसे, अगर डर आ रहा है, तो उसे सिर्फ देखना, उससे लड़ना नहीं।
एसीटी (ACT): इसमें आपको यह सिखाया जाता है
कि अपने डर के साथ भी आप अपनी जिंदगी को अच्छे से जी सकते हैं।
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दवाइयां (Medications)
कुछ मामलों में, डॉक्टर आपको दवाइयां दे सकते हैं,
जिससे दिमाग शांत रहता है और डर कम होता है।
यह दवाइयां हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए।
कुत्ते के काटने के बाद (After a Dog Bite):
तुरंत अस्पताल जाएं और रेबीज का टीका लगवाएं।
अगर डर बहुत ज्यादा है, तो डॉक्टर से बात करें।
याद रखें
इलाज में समय लगता है, इसलिए धीरज रखें।
डॉक्टर की सलाह को हमेशा मानें।
परिवार और दोस्तों का साथ बहुत जरूरी है।
अगर आप या आपका कोई जान-पहचान वाला रेबीज ओसीडी से परेशान है,
या कुत्ते के काटने के बाद डर महसूस कर रहा है, तो सही डॉक्टर से संपर्क करें। सुधार संभव है।
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